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नई दिल्ली। आजकल साइबर अटैक का खतरा किसे नहीं होता है। बड़े-बड़े संस्थान पर भी हैकर्स हमला कर देते हैं। यहां तक कि सरकारी संस्थान पर भी हैकर्स अपना हाथ साफ करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। ऐसा ही एक नए साइबर अटैक का मामला सामने आया है, जिसमें ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) पर ही हैकर्स ने साइबर अटैक किया है।

आपको बता दें कि एम्स भारत के सबसे बड़े हेल्थकेयर संस्थान में से एक है। इस अस्पताल में भारत ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बहुत सारे मरीज अपना इलाज कराने के लिए आते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पर ransomware attack नाम का एक साइबर हमला हुआ है।

एम्स पर हुआ बड़ा साइबर हमला

इस साइबर अटैक की वजह से अस्पताल के डेली कामकाज जैसे नियुक्ति, मरीजों का पंजीकरण, डिस्चार्ज स्लिप आदि की जानकारी पर काफी बुरा असर पड़ा है। National Information Centre (NIC) और Cert-In की एक रिपोर्ट के अनुसार एम्स पर यह बड़ा साइबर अटैक हुआ है। हालांकि, अभी तक इस बात की जानकारी साफ नहीं हुई है कि एम्स का सर्वर दोबारा शुरू हुआ है या नहीं। आइए हम आपको ransomware attack के बारे में बताते हैं कि यह क्या है और कितना खतरनाक है।

ransomware एक तरह का मालवेयर या खतरनाक सॉफ्टवेयर है, जो विकटिम के फाइल या्नी डेटा तो इनक्रिप्ट करता है और एक रेंमन के लिए यानी उस डेटा को रिस्टोर करने के लिए पूछता है। इसे सरल भाषा में समझाएं तो हैकर्स इस साइबर अटैक के जरिए पहले विकटिम का डेटा चोरी करते हैं और फिर उसे ही रिस्टोर करने के लिए उनसे ही पैसों की मांग करते हैं।

अगर विकटिम हैकर्स की मांग को पूरा नहीं करता हैं तो वो उन चोरी किए गए डेटा को पब्लिक डोमेन या डार्क वेब में डालने की धमकी देते हैं। अगर किसी का डेटा डार्क वेब में चला जाता है तो कोई भी हैकर्स आसानी से उसका एक्सेस ले सकता है और विकटिम को काफी नुकसान पहुंचा सकता है।



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By Ajay Kumar Verma

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